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मिलिट्री के नाम पर एक नया फ्रॉड ट्रेंड: अब धोखेबाज़ मिलिट्री वाले बनकर दे रहे हैं धोखा
PhonePe Regional|4 min read|29 July, 2026
हमारी ‘ट्रस्ट एंड सेफ्टी’ टीम की रिसर्च में एक चिंताजनक बात सामने आई है- खुद को भारतीय सशस्त्र बलों का जवान बताकर मासूम लोगों को ठगने वाले स्कैमर्स की सँख्या तेज़ी से बढ़ रही है। हमारी मिलिट्री के प्रति हर भारतीय के दिल में जो गहरा सम्मान और भरोसा है, ये धोखेबाज़ उसी का फ़ायदा उठाते हैं। वे लोगों को भरोसे में लेकर अत्यंत दबाव वाली स्थिति पैदा करते हैं और उनकी गाढ़ी कमाई ऐंठ लेते हैं। देश के अलग-अलग भागों में पैर पसार रहे इस नए स्कैम को समझना और इससे बचना अब बेहद ज़रूरी हो गया है।
एक आम स्थिति
यह खेल कितनी सफाई से खेला जाता है, इसे समझने के लिए नीचे दी गई तस्वीर पर नज़र डालिए। यहाँ एक आम स्थिति दिखाई गई है जहाँ ठग खुद को मिलिट्री का अफसर बताकर ऑनलाइन लिस्ट किए गए फर्नीचर को खरीदने में दिलचस्पी दिखाता है। अपनी फर्जी पहचान का रौब दिखाकर वह जल्दबाज़ी करता है और बेचने वाले पर दबाव बनाता है। स्कैमर उसे ऐसा उलझाता है कि सेलर को पैसे मिलने के बजाय, उल्टा अपनी ही जेब से पैसे गँवाने पड़ जाते हैं।

इस ब्लॉग में आपको बताया गया है कि यह ‘सोशल इंजीनियरिंग अटैक’ असल में कैसे काम करता है, और साथ ही PhonePe के उन एडवांस्ड सिक्योरिटी टूल्स की जानकारी देगा जो आपके पैसों को हर पल सुरक्षित रखते हैं।
यह स्कैम कैसे काम करता है?
यह ठगी का एक बहुत ही आम तरीका है, जिसे ‘सोशल इंजीनियरिंग अटैक’ कहते हैं। इसमें धोखेबाज़ कॉल करके लोगों पर ऐसा मानसिक दबाव बनाते हैं कि वे बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी में गलत फ़ैसला कर बैठते हैं। ऊपर दिए गए मामले में भी यही हुआ- पैसे कटने में कुछ ही सेकंड लगे! सेलर ने खुद को मिलिट्री का अफसर बताने वाले व्यक्ति पर भरोसा कर लिया और पैसे मिलेंगें यह सोचकर अपना UPI पिन डाल दिया और बस सेकंडों में उनके अकाउंट से पैसा निकल गया।
मिलिट्री अफसर बनकर धोखाधड़ी करने का तरीका
1. लोगों को निशाना बनाने वाला पेमेंट ट्रैप
- कौन बनता है इनका निशाना: स्कैमर्स अक्सर ऑनलाइन सामान बेचने वालों, किराएदार ढूँढ रहे मकान मालिकों, डॉक्टरों, ट्यूटर्स और लोकल सर्विस प्रोवाइडर्स को अपना निशाना बनाते हैं।
- जाल: ये लोग खुद को मिलिट्री अफ़सर या जवान बताते हैं (जैसे ऊपर के उदाहरण में “कैप्टन कुमार”) और कहते हैं कि उन्हें आपका सामान या सर्विस तुरंत चाहिए, लेकिन “आर्मी कैंप के सख़्त नियम” का बहाना बनाकर आपसे सीधे नहीं मिलते।
- भरोसा जीतने की मनोवैज्ञानिक चाल: आपका विश्वास जीतने के लिए स्कैमर्स नकली डॉक्यूमेंट्स शेयर करते हैं-जैसे नकली आईडी कार्ड, नकली आईडी प्रूफ और उनकी नकली तस्वीरें। इसके बाद, वे आपको विश्वास दिलाते हैं कि आपको एक आधिकारिक “सरकारी मर्चेंट वॉलेट” के ज़रिए एडवांस पेमेंट भेजा जा रहा है।
- धोखाधड़ी का तरीका: वे आपको पेमेंट रिक्वेस्ट या QR कोड भेजते हैं और कहते हैं कि “ट्रांसफर कन्फर्म करने” के लिए UPI पिन दर्ज करें, जैसे ही आप पिन डालते हैं, आपके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं और आपका अकाउंट खाली हो जाता है।
2. बिजनेस को निशाना बनाने वाला एडवांस ट्रैप
- कौन बनता है इनका निशाना: थोक व्यापारी और छोटे‑मंझोले कारोबारी
- लालच: फ़र्ज़ी मिलिट्री अफ़सर बनकर धोखा देने वाला व्यक्ति, कैंप के लिए भारी मात्रा में सामान खरीदने की बात करके आपको लालच देता है।
- भरोसा जीतने की मनोवैज्ञानिक चाल: इसके बाद, सेना की खरीदारी से जुड़े सख्त नियमों का हवाला देकर यह धोखेबाज़ दावा करता है कि मर्चेंट को पहले “मर्चेंट रजिस्ट्रेशन फीस” या “सिक्योरिटी डिपॉजिट” जमा करना होगा।
- धोखाधड़ी: तय फ़ीस का पैसा मिलते ही धोखेबाज़ गायब हो जाता है और अब उससे संपर्क करने का कोई तरीका नहीं बचता।
PhonePe के ऑटोमेटेड डिफेंस टूल्स
PhonePe में ऐसे डायनामिक स्कैम को पहचानने और रोकने के लिए सख्त साइबर-सिक्योरिटी सिस्टम हैं। इसका एक रियल-टाइम सिक्योरिटी फीचर है ‘PhonePe प्रोटेक्ट- यह PhonePe का अपना AI-आधारित सुरक्षा फ्रेमवर्क है, जो सीधे डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) के साथ इंटीग्रेटेड है। यह बेनिफ़िशियरी के फ़ोन नंबर की जाँच, धोखाधड़ी करने वालों के तौर पर रिपोर्ट किए गए लोगों के लाइव नेशनल डेटाबेस से करता है। यह इस तरह काम करता है:
- इंस्टेंट ब्लॉक: यदि PhonePe प्रोटेक्ट किसी फ़ोन नंबर को ‘हाई रिस्क’ बताता है, तो PhonePe अपने-आप पेमेंट को तुरंत ब्लॉक और रिजेक्ट कर देता है।
- एक्टिव सिक्योरिटी अलर्ट: यदि PhonePe को कोई ट्रांजेक्शन संदिग्ध लगता है, तो वह यूज़र के पैसे बचाने के लिए ट्रांजेक्शन को तुरंत पॉज कर देता है। फिर स्क्रीन पर एक सिक्योरिटी अलर्ट आता है, जो यूज़र को चेतावनी देता है और पूछता है कि कहीं कोई कॉल पर उन्हें बहकाने या दबाव बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहा। UPI पिन दर्ज करने से ठीक पहले यूज़र को सतर्क करने वाला यह अलर्ट कुछ ऐसा दिखता है:

रिपोर्ट कैसे करें
यदि आपको लगता है कि आप किसी फ्रॉड का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत इसकी रिपोर्ट करें।
PhonePe पर रिपोर्ट करें:
- PhonePe ग्रुप चैट: यदि आपको लगता है कि यह एक फ्रॉड ग्रुप है, तो आप ग्रुप प्रोफ़ाइल में “Exit/बाहर निकलें” और “Report/रिपोर्ट करें” ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं।
- PhonePe ऐप: हेल्प सेक्शन में जाकर शिकायत दर्ज करें।
- PhonePe कस्टमर केयर: 80–68727374 या 022–68727374 पर कॉल करें।
- सोशल मीडिया पर रिपोर्ट करें:
- Twitter: PhonePe Support
- Facebook: PhonePe Official
- शिकायत निवारण: PhonePe शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
अधिकारियों को रिपोर्ट करें:
- साइबर क्राइम सेल: साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें या 1930 पर कॉल करें।
- डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन (DOT): संचार साथी पोर्टल पर चक्षु सुविधा के ज़रिए संदिग्ध मैसेज, कॉल, या WhatsApp/Telegram फ्रॉड की रिपोर्ट करें।
महत्वपूर्ण रिमाइंडर— PhonePe कभी भी गोपनीय या व्यक्तिगत जानकारी नहीं माँगता है। यदि PhonePe से होने का दावा करने वाले सभी ईमेल phonepe.com डोमेन से नहीं हैं, तो उन्हें अनदेखा करें। अगर आपको फ्रॉड का संदेह है, तो कृपया तुरंत अधिकारियों से संपर्क करें।
